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संघर्ष

struggle-for-success-in-life
छुए मिट्टी को तो सोना बन जाए, ऐसा उसका स्पर्श ।
अचरज में न आओ यारो क्योंकि करता है वो संघर्ष ।।
जो ठोकरों से गिरता जख्मी होता, उसको जीवन मे केसा हर्ष।
जो धूल झटकता भूल समझता , करता वही अपनी मंजिल को स्पर्श ।।
पीकर घुट अपमान का, चढ़ता है न जाने कैसा नशा ।
लड़खड़ाते कदम और झुकी नज़र का होता है कैसा तमाशा ।।
झुकी नज़र को उठा, सूरज से नज़र मिला ।
अज्ञान के अंधेरे को चीर कर, ज्ञान को गले लगा ।।
कदमो को संभाल, खुदका एक रास्ता बना ।
कूच कर मंजिल की और, चलते-चलते अपनी एक महफ़िल बना ।।
छोड़ घमंड को भूल पाखंड को, ज्ञान को अपने मे समा ।
मंजिल को स्पर्श कर, पथ पर अपने पदचिन्ह बना ।
वक़्त की रेत पर संघर्षो के पदचिन्ह बना,
संघर्षो के पदचिन्ह बना ।।

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